शिक्षक की पीएम से अपील:बोले- स्कूलों में अधिक छुट्टियां हैं, कोर्स पूरा नहीं हो पा रहा, बिरसा मुंडा के बारे में भी नहीं है किसी को जानकारी
ललित सरदाना, प्रदेश के देवास से हैं। जो पिछले 25 सालों से आईआईटी और मेडिकल में प्रवेश परीक्षा के लिए बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वे स्कूल का संचालन भी कर रहे हैं। 15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती है। इस दिन विद्यालयों की छुट्टी है। क्या छुट्टी से बच्चों को बिरसा मुंडा के बारे में जानकारी मिल पाएगी। उनके बारे में बच्चे जान पाएंगे। इस देश की आधी से अधिक जन संख्या को मुंडा के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन अगर उस दिन स्कूल खोले जाएं। मुंडा से संबंधित जानकारी बच्चों को दी जाए। इससे वे उन्हें जानेंगे। पिछले दो सालों से ढंग से पढाई नहीं हो सकी है। ऑनलाइन क्लास में ढंग से पढाई भी नहीं हो सकी है। अब स्कूल खुले हैं, तीन महीने कुल बचे हैं। इसी में कोर्स पूरा करवाना है। प्रेबोर्ड होना है। बोर्ड देना है।
स्कूल तो जल्दी बंद हो गए। लेकिन व्यापारिक प्रतिष्ठान दिन भर चलते रहे। इसमें नुकसान किसके हो रहा है। अंतिम पायदान में किसी को रखा गया है तो वो है पढाई। हमें आगे से इस पर ध्यान देना है। क्या पता अगले साल दोबारा कोरोना आ जाए। इसलिए हम जितना पढ़ाना चाहते हैं, उतना पढ़ा नहीं पा रहे। ऑफलाइन क्लास शुरू है, जिसमे 30 में से सिर्फ 15 बच्चे ही स्कूल आते हैं। इससे बच्चे आगे पीछे हो रहे हैं पढ़ाई में। अगर गर्मी है तो स्कूलों की छुट्टी, ठंडी है तो छुट्ठी, दिवाली है तो छुट्टी, होली है तो छुट्टी, ईद है तो छुट्टी। हर बार विद्यार्थी सफर करते हैं। सिलेबस पूरा करवाने का समय चाहिए। लेकिन समय नहीं है।
स्टडी अड्डा के सरदाना ने पीएम मोदी से अपील की है कि जिन्हें छुट्टियों में मजा आता है, वे मुझसे असहमत हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ दिनों में स्कूल के कार्य दिवस कम रह गए हैं, और छुट्टियां अधिक हो गई हैं। हमें हमारे बच्चों को फिर से आगे बढ़ाना है। छुट्टियों के चक्कर में परिजनों में दोगुना आर्थिक बोझ पड़ता है। क्योंकि जब छुट्टियां होती हैं तो कोर्स पूरा नहीं हो पाता। इसलिए परिजन उन्हें कोचिंग भेजते हैं। ऐसे परिजनों पर स्कूल और कोचिंग डबल फीस का बोझ पड़ता है। छुटियों में बच्चे दिन भर मोबाइल में लगे रहते हैं। वो हमारी संस्कृति को ख़राब कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में बहुत क्राइम बढ़ गए हैं। जैसे सुसाइड, मर्डर आदि। पीएम से उन्होंने अनुरोध किया कि आप कुछ ऐसा कीजिए जिस से बच्चे अधिक समय स्कूल में लगाएं। हम उनसे अधिक से अधिक जुड़ पाएं। जैसा सपना आपने देखा है, देश को आगे बढ़ाने का वैसे ही देख आगे बढ़ पाए।
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